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कैसे होता है चिकनगुनिया? जानिए लक्षण और बचाव के उपाय

  • July 31, 2024
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नई दिल्ली : मानसून के दिनों में कई तरह के मच्छर जनित बीमारियों का जोखिम काफी बढ़ जाता है। तेज बारिश, जलभराव और बाढ़ जैसी स्थितियां मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल होती हैं। इस कारण मानसून और बाद के कुछ महीनों में डेंगू-मलेरिया और चिकनगुनिया जैसे वायरल रोगों का आंकड़ा बढ़ जाता है। डॉक्टर बताते हैं कि चिकनगुनिया शरीर के लिए काफी हानिकारक हो सकता है। हर साल चिकनगुनिया के हजारों मामले सामने आते हैं। ऐसे में चिकनगुनिया के कारण और लक्षण जानकर इस रोग से बचाव के उपाय अपना सकते हैं।

चिकनगुनिया क्यों होता है

चिकनगुनिया बुखार डेंगू की ही तरह मच्छरों के कारण होने वाली गंभीर समस्या है। संक्रमित मादा एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से इंसानों में चिकनगुनिया का खतरा होता है। इस रोग की पुष्टि केवल रक्त परीक्षण करके ही की जा सकती है। चिकनगुनिया के लिए कोई टीका उपलब्ध नहीं है। अगर 3-4 दिन तक चिकनगुनिया से संबंधित लक्षण बने रहते हैं तो किसी विशेषज्ञ से सलाह लेकर परीक्षण अवश्य करा लेना चाहिए।

चिकनगुनिया के लक्षण

चिकनगुनिया में रोगी को अचानक तेज बुखार के साथ अंगों पर वायरल चकत्ते, जोड़ों में तेज दर्द, सिर दर्द, भूख न लगना जैसे लक्षण दिखते हैं। चिकनगुनिया का इनक्यूबेशन पीरियड 2-6 दिन होता है। कुछ लोगों को चिकनगुनिया के ठीक होने के कई महीनों बाद तक भी जोड़ों के दर्द की समस्या बनी रह सकती है। चिकनगुनिया के दीर्घकालिक मामलों में क्रोनिक आर्थराइटिस और तंत्रिका संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

चिकनगुनिया का इलाज

चिकनगुनिया के लिए कोई विशिष्ट एंटीवायरल दवा नहीं है, न ही कोई वैक्सीन है। इसलिए उपचार में लक्षणों को कम करने और जटिलताओं से राहत दिलाने के लिए प्रयास किया जा सकता है। रोगी को अधिक से अधिक तरल पदार्थ पीना चाहिए और आराम की सलाह दी जाती है।

चिकनगुनिया से बचाव

चिकनगुनिया मच्छरों से फैलता है। एडीज मच्छर दिन में सक्रिय होते हैं इसलिए मच्छरों से बचाव करते इस बीमारी के जोखिम को कम किया जा सकता है। बचाव के लिए कुछ बातों का ध्यान रखें।
पूरी बाजू की शर्ट और पैंट पहनें जिससे मच्छरों से बचाव किया जा सके।

जिन स्थानों पर वायरल बुखार का संक्रमण है, वहां जाने से बचें।
मच्छरों से बचाव के लिए स्प्रे व दवाओं का इस्तेमाल करें।
रात में सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करके भी सुरक्षित रहने का प्रयास किया जा सकता है।
यदि 3-4 दिन तेज बुखार आए तो डॉक्टर की सलाह से खून का जांच जरूर करा लें, ताकि सही समय पर उचित निदान किया जा सके।


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