नई दिल्ली : अभी तक हर किसी को यही जानकारी है कि सूर्य का चक्कर पृथ्वी लगाती है। इसकी वजह से धरती पर दिन और रात होते हैं। लेकिन अगर आप वैज्ञानिकों के नजरिए से समझेंगे, तो असल में पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा नहीं करती है। आखिर ऐसा क्यों है या यह कितना सच है, यह बात अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने समझाई है।
नासा की तरफ से कहा गया है कि अगर सौरमंडल में पृथ्वी की मौजूदा गति को समझने की कोशिश की जाती है, तो पाया जाएगा कि धरती इस समय सूर्य की परिक्रमा नहीं कर रही है। हमारे सौरमंडल में सूर्य सबसे बड़ा पिंड है। सूर्य का भार बृहस्पति ग्रह से 1,048 गुना अधिक है। तो वहीं माना जाता है कि किसी खोगलीय वस्तु पर पृथ्वी के लगने वाले गुरुत्व बल का खिंचाव समान या कम होता है।
नासा की तरफ से बताया गया है कि केप्लर के तीसरे नियम से जानकारी मिलती है कि एक दूसरे के चारों तरफ घूमने वाली दो वस्तुओं के भार और कक्षा के बीच संबंध है। इस तरह समझिए कि एक बड़े तारे की कक्षा में एक छोटा तारा एक बड़े तारे की परिक्रमा रहा हो।
वास्तव में दोनों तारे भार के एक सामान्य केंद्र के चारों तरफ घूमते हैं। इसे बैरीसेंटर कहा जाता है। यह सच है कि चाहे हर वस्तु का आकार या भार कुछ भी हो। इसलिए पृथ्वी एक बैरीसेंटर के चारों तरफ घूमती है। न कि सूर्य की परिक्रमा करती है।
आमतौर पर सौर मंडल में सूर्य के पास पिंडों का बैरीसेंटर होता है। तो वहीं खुद के भार और गुरु और शनि जैसे बड़े ग्रहों और कक्षाओं के प्रभाव की वजह से यह शायद ही कभी सूर्य के अंदर होता है। इसके कारण ही वर्तमान समय में सूर्य के अंदर बैरीसेंटर नहीं है, बल्कि बाहर है।
ग्रहीय खगोलशास्त्री और विज्ञान संचारक जेम्स ओ डोनोग्यू ने बताया कि ग्रह सामान्य शब्दों में तो सूर्य की ही परिक्रमा करते हैं, लेकिन तकनीकी तौर पर भारी गुरु ग्रह का असर होने से ग्रहों को अंतरिक्ष में एक नए बिंदु का चक्कर लगाना चाहिए। सिर्फ इसी बात को वैज्ञानिक की तरफ से सटीक और वास्तविक तौर पर समझाने की कोशिश की जा रही है।




