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गरबा पार्टनर के नाम पर वायरल हुए पोस्टर,

  • September 22, 2026
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नवरात्रि से पहले सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ‘Rent A Garba Partner’ के पोस्टरों ने अब साइबर सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुंबई समेत कई शहरों में ऐसे पोस्ट और अकाउंट सामने आने के बाद मामले की जांच की मांग की गई है। मुंबई से भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने मुंबई पुलिस को पत्र लिखकर इन विज्ञापनों की सत्यता, इनके पीछे मौजूद लोगों और इनके मकसद की जांच करने को कहा है। अहमदाबाद साइबर क्राइम सेल भी ऐसे वायरल पोस्ट को लेकर लोगों को अनजान प्रोफाइल पर पैसे ट्रांसफर नहीं करने की चेतावनी दे चुका है।

Silver, Gold और Platinum पैकेज का दावा

वायरल पोस्टरों में Silver, Gold और Platinum जैसे पैकेज दिखाए गए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में कुछ पोस्ट में 1,000 से 2,000 रुपये तक की कीमत बताई गई है। इनमें दो घंटे से लेकर पूरी रात तक गरबा पार्टनर उपलब्ध कराने का दावा किया गया है।

पोस्ट में गरबा के स्टेप सिखाने, मैचिंग आउटफिट, सेल्फी और सोशल मीडिया के लिए रील्स जैसी सेवाओं का भी जिक्र है। कुछ वायरल पोस्ट में माथे पर किस और देर रात साथ घूमने या घर तक छोड़ने जैसी बातों का भी दावा किया गया है।

कुछ अन्य वायरल पोस्ट में इससे अलग कीमतें भी दिखाई गई हैं। इनमें पैकेज की कीमत 3,000 रुपये से बढ़कर 6,500 रुपये तक बताई गई है। हालांकि, इन विज्ञापनों की वास्तविकता और इनके पीछे कौन लोग हैं, यह जांच का विषय है।

अनजान अकाउंट पर पैसे भेजने से सावधान

अहमदाबाद साइबर क्राइम सेल ने ऐसे पोस्ट के मामले में लोगों को खास सावधानी बरतने को कहा है। साइबर सेल के मुताबिक अनजान सोशल मीडिया प्रोफाइल पर भरोसा करके पैसे भेजने से धोखाधड़ी का खतरा हो सकता है। अधिकारियों ने ऐसे ऑफर के जवाब में पेमेंट करने से बचने की सलाह दी है।

साइबर अधिकारियों ने यह भी बताया कि ‘Rent A Garba Partner’ से जुड़े कुछ पोस्ट बाद में अलग-अलग हैंडल पर AI-generated कंटेंट के रूप में सामने आए। ऐसे पोस्ट के जरिए लोगों को फर्जी ऑफर के नाम पर फंसाने की आशंका की जांच की जा रही है।

संजय उपाध्याय ने मुंबई पुलिस से मांगी जांच

भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने मुंबई पुलिस को पत्र लिखकर इन विज्ञापनों की जांच की मांग की है। उन्होंने यह पता लगाने की मांग की है कि ये पोस्ट वास्तविक सेवा से जुड़े हैं या इनके पीछे कोई दूसरा मकसद है।

उन्होंने सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स के जरिए इस तरह की गतिविधियों को बढ़ावा दिए जाने की आशंका का भी मुद्दा उठाया है। पुलिस से विज्ञापनों की सत्यता, आयोजकों और इनके पीछे मौजूद लोगों की जानकारी जांचने को कहा गया है।

अब जांच के सामने कई सवाल

फिलहाल वायरल पोस्ट अपने आप में यह साबित नहीं करते कि इनके पीछे साइबर ठगी या कोई रैकेट चल रहा है। जांच का मकसद इन्हीं सवालों के जवाब तलाशना है।

  • क्या ये पोस्ट सिर्फ सोशल मीडिया ट्रेंड या मजाक हैं?
  • क्या इनके जरिए लोगों से पैसे लेकर साइबर ठगी की जा सकती है?
  • क्या गरबा पार्टनर के नाम पर किसी दूसरे तरह की गतिविधि चलाने की कोशिश हो रही है?
  • क्या कुछ पोस्ट AI की मदद से तैयार किए गए हैं?
  • इन विज्ञापनों के पीछे मौजूद अकाउंट और लोगों की वास्तविक पहचान क्या है?

जांच पूरी होने के बाद ही इन सवालों पर तस्वीर साफ होगी।


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