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त्वचा के रंग में हो रहा है बदलाव तो संभल जाएं, ये हो सकता है ‘विटिलिगो’ का संकेत

  • July 17, 2024
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नई दिल्ली : अगर आप अपनी त्वचा में किसी भी तरह का रंग परिवर्तन महसूस कर रही हैं तो इस पर फौरन ध्यान दें, क्योंकि यह ‘विटिलिगो’ का संकेत हो सकता है।

अगर आप अपनी त्वचा में किसी भी तरह का रंग परिवर्तन महसूस कर रही हैं तो इस पर फौरन ध्यान दें, क्योंकि यह ‘विटिलिगो’ का संकेत हो सकता है। आपने बहुत से लोगों को देखा होगा, जिनकी त्वचा सफेद होने लगती है। असल में, इसे चिकित्सा की भाषा में ‘विटिलिगो’ कहा जाता है। यूं तो यह समस्या व्यक्ति की सेहत पर कोई बुरा असर नहीं डालती, लेकिन जो इसे स्वीकार नहीं कर पाते हैं, उन्हें यह मानसिक और भावनात्मक रूप से काफी हद तक परेशान करती है। ऐसे में विटिलिगो क्यों होती है और इसके फैलने पर क्या करना चाहिए, इन सवालों के जवाब आपको जानने जरूरी हैं।

क्या है यह बीमारी

शरीर पर होने वाले सफेद दाग को चिकित्सा की भाषा में विटिलिगो कहा जाता है। विटिलिगो एक ऐसी स्थिति है, जिसमें त्वचा का रंग हल्का पड़ने लगता है या सफेद हो जाता है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण रंग उत्पादन करने वाली कोशिकाएं मर जाती हैं। स्व-प्रतिरक्षित रोग , जैसे कि थायरॉयड रोग या टाइप 1 डायबिटीज के कारण भी त्वचा के रंग में बदलाव देखा जाता है।

त्वचा के अधिक धूप में आने, तनाव या केमिकल्स के संपर्क में आने से भी यह परेशानी दिखाई देती है। इसके अलावा विटिलिगो के जेनेटिक कारण भी हो सकते हैं। इस रोग में मरीज के शरीर के लगभग सभी अंगों पर सफेद धब्बे होते हैं, जो ज्यादातर पैरों, चेहरे और हाथों पर दिखते हैं। विटिलिगो यानी सफेद दाग त्वचा संबंधी बीमारियों में से एक बीमारी है, जो खून से संबंधित एलर्जी, गलत खान-पान और स्किन इन्फेक्शन के कारण होती है।

लक्षणों की पहचान

विटिलिगो की शुरुआत आम होती है। यह प्रायः शरीर में खुजली से शुरू होती है। इसके बाद शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर सफेद रंग के छोटे या बड़े दाग दिखने लगते हैं। आमतौर पर ये दाग मरीज को किसी भी तरह से तकलीफ नहीं पहुंचाते, लेकिन कई बार इनकी वजह से दूसरे लोग इस बीमारी से पीड़ित मरीजों से डरने लगते हैं।

लोगों के ऐसे बर्ताव से मरीज में तनाव और हीनभावना पैदा हो जाती है, जो उसे मानसिक हानि पहुंचाती है। त्वचा का रंग फीका पड़ना विटिलिगो का मुख्य लक्षण है। इसके अलावा ढेर सारे मामलों में मुंह के अंदर के टिशू का रंग बदलना, गर्दन पर सफेद दाग, पीठ पर सफेद दाग और आंखों के रेटिना की अंदर की परत का रंग फीका पड़ना भी इसके लक्षण हो सकते हैं।

मेलानोसाइट्स है मुख्य वजह

त्वचा में सफेद दाग बनने के कई कारण हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि त्वचा में सफेद दाग तब बनते हैं, जब किसी व्यक्ति के शरीर में रंग उत्पादन करने वाली कोशिकाएं अपना काम करना बंद कर देती हैं। ये कोशिकाएं हमारे बाल, त्वचा, होंठ आदि को रंग प्रदान करती हैं, जिससे हमारा व्यक्तित्व निखर कर समाने आता है।

जल्दी इलाज करना है जरूरी
इस मामले में डॉ. सीमा रानी, प्रोफेसर, त्वचा विज्ञान विभाग, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, दिल्ली का कहना है कि, विटिलिगो एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है। 10 से 20 प्रतिशत मामलों में यह बीमारी पारिवारिक होती है। यह बीमारी केवल त्वचा को प्रभावित करती है। यह अन्य ऑटोइम्यून बीमारियों से भी जुड़ी हो सकती है, जैसे कि थायरॉयड, एनीमिया आदि। अन्य एटीऑलोजिकल कारक, जैसे कि कुछ एलर्जी, विशेष रूप से सौंदर्य प्रसाधन, हेयर डाई, रंग एजेंट, गोंद त्वचा में मेलेनिन वर्णक को नष्ट कर सकते हैं, जिससे विटिलिगो जैसे घाव या रासायनिक ल्यूकोडर्मा का विकास हो सकता है। वहीं, कुछ कारक प्रसार का कारण बनते हैं, जिनमें पोषण की कमी, विशेष रूप से विटामिन बी 12, विटामिन डी, एनीमिया, खुजली आदि। कुछ मामलों में तनाव भी इसका कारण बनता है। इन मामलों में दवाएं और सर्जरी, दोनों हो सकती हैं और जल्दी इलाज शुरू कराने से बेहतर नतीजे मिलते हैं।


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