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पिछड़ा वर्ग समाज के आरक्षण कटौती के विरोध में बस्तर बंद, व्यापक असर

  • December 30, 2024
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बस्तर।आगामी निकाय और ग्राम पंचायत चुनावों को लेकर छत्तीसगढ़ में आरक्षण प्रक्रिया के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। पिछड़ा वर्ग समाज ने आरक्षण में कटौती का आरोप लगाते हुए बस्तर बंद का आह्वान किया। इसका व्यापक असर पूरे बस्तर क्षेत्र में देखा गया, जहां बाजार, स्कूल, और परिवहन सेवाओं पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा।

आरक्षण प्रक्रिया पर उठे सवाल

पिछड़ा वर्ग समाज का कहना है कि इस बार की आरक्षण प्रक्रिया में उनके अधिकारों का हनन हुआ है। समाज के नेताओं ने दावा किया है कि पिछड़ा वर्ग की सीटों को कम कर दिया गया है, जिससे उनकी राजनीतिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व प्रभावित हुआ है। समाज ने इसे अपने साथ हुए “अन्याय” की संज्ञा दी है।

पिछड़ा वर्ग समाज के एक प्रमुख नेता ने कहा, “यह आरक्षण प्रक्रिया हमारे अधिकारों को छीनने का प्रयास है। हमें हमारे हिस्से का प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, लेकिन सरकार ने हमारी सीटें घटाकर हमारे राजनीतिक अस्तित्व पर हमला किया है।”

कांग्रेस ने साधा सरकार पर निशाना

इस मुद्दे पर कांग्रेस ने राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया कि बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में आरक्षण लागू करने से पहले उचित अध्ययन नहीं किया गया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस प्रक्रिया में पिछड़ा वर्ग समाज को भारी नुकसान झेलना पड़ा है।

कांग्रेस के प्रवक्ता ने कहा, “सरकार ने आरक्षण तय करते समय सामाजिक संरचना का ध्यान नहीं रखा। बस्तर और सरगुजा के ओबीसी वर्ग को नजरअंदाज कर दिया गया है। यह न केवल अन्याय है बल्कि सामाजिक संतुलन को भी बिगाड़ने वाला कदम है।”

सरकार ने किया बचाव

उधर, राज्य के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने आरक्षण प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग का गठन किया था। आयोग की अनुशंसा के आधार पर ही आरक्षण तय किया गया।

अरुण साव ने कहा, “सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार, ट्रिपल टेस्ट और विस्तृत अध्ययन के बाद आरक्षण की व्यवस्था लागू की गई है। राज्य सरकार ने इस प्रक्रिया को पारदर्शिता के साथ लागू किया है।”

बस्तर बंद का व्यापक असर

बस्तर बंद के दौरान क्षेत्र में सभी प्रमुख बाजार और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। सरकारी और निजी कार्यालयों में उपस्थिति कम देखी गई। स्कूल-कॉलेज भी प्रभावित हुए। सड़कों पर वाहनों की आवाजाही सीमित रही और कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने धरना दिया।

राजनीतिक और सामाजिक असर

इस विरोध से साफ है कि आगामी पंचायत और निकाय चुनावों में आरक्षण का मुद्दा प्रमुख रहेगा। यह केवल पिछड़ा वर्ग समाज का राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे राज्य में सामाजिक संतुलन और नीतियों पर सवाल खड़े कर रहा है।

आगे की राह

पिछड़ा वर्ग समाज ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे और बड़े आंदोलन करेंगे। सरकार के लिए यह चुनौती है कि वह इस विवाद को सुलझाने के लिए संवाद का रास्ता अपनाए और सभी वर्गों को संतुष्ट करे।

राजनीतिक और सामाजिक मोर्चे पर यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गर्मा सकता है। देखना यह होगा कि राज्य सरकार इस संकट का समाधान कैसे करती है।


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