नई दिल्ली : कोविड-19 वैश्विक स्तर पर गंभीर स्वास्थ्य जोखिम रहा है। सार्स-सीओवी-2 वायरस के कारण होने वाली ये बीमारी स्वास्थ्य को कई प्रकार से प्रभावित करती हुई देखी गई है। भले ही इन दिनों देश में संक्रमण के मामले काफी कम हैं, पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि इसके जोखिमों को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। कई देशों में अब भी हर सप्ताह बड़ी संख्या में संक्रमितों की मौतें रिपोर्ट की जा रही है, जिससे स्पष्ट होता है कि कोरोना अभी गया नहीं है।
हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मध्य प्रदेश में तीन लोगों में कोरोना के मामलों की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को लगातार कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करते रहना चाहिए।
शुक्रवार को सरकार ने संसद में सूचित किया कि देश में कोविड मामलों में वृद्धि के लिए दो स्ट्रेन जिम्मेदार हैं, हालांकि इन्हें ज्यादा खतरनाक नहीं माना जा रहा है।
सरकार ने दी जानकारी
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने शुक्रवार को बताया कि केपी.1 और केपी.2 दो प्रमुख वैरिएंट्स हैं जिसके कारण देश में संक्रमण का खतरा देखा जा रहा है। आईसीएमआर द्वारा साझा किए गए डेटा के मुताबिक ये दोनों सब-वैरिएंट्स ओमिक्रॉन वैरिएंट जेएन1 का ही रूप हैं।
लोकसभा में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 5 अगस्त तक कोविड-19 केपी म्यूटेंट स्ट्रेन के 824 मामले दर्ज किए गए। महाराष्ट्र में सबसे अधिक 417 मामले थे, उसके बाद पश्चिम बंगाल में 157 और उत्तराखंड में 64 मामले रिपोर्ट हुए हैं।
गंभीर मामलों को जोखिम कम
रिपोर्ट के मुताबिक इन वैरिएंट्स के कारण कुछ स्थानों पर संक्रमण के मामले जरूर बढ़े हैं, पर अभी तक अस्पताल में भर्ती होने वालों या बीमारी की गंभीरता का खतरा नहीं देखा गया है। सरकार की तरफ से जारी डेटा के मुताबिक यह अत्यधिक संक्रामक वैरिएंट है जो बुखार, सर्दी, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द और थकान जैसे लक्षण पैदा करता है, जो आमतौर पर गंभीर नहीं होते हैं। सरकार ने नए स्ट्रेन के प्रसार की निगरानी के लिए भी जरूरी कदम उठाए हैं।
राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र ने बताया कि एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम इसकी निगरानी कर रहा है जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत एक प्रमुख परियोजना है। इसे सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया गया है।
अब भी कई देशों में बना हुआ है मौत का खतरा
कोरोना के वैश्विक खतरे को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस महीने की शुरुआत में जारी एक रिपोर्ट में कहा कि संक्रमण के कारण दुनियाभर में हर हफ्ते लगभग 1,700 लोगों की मौत हो रही है। कोरोना का जोखिम अब भी कम नहीं हुआ है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा है कि जिन स्थानों पर लगातार संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं वहां के लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली को और मजबूत करने के लिए एक और बूस्टर वैक्सीन दिया जाना चाहिए। विशेषतौर पर 65 से अधिक आयु के लोगों को एक और टीका देकर उन्हें नए वैरिएंट्स से संक्रमण के प्रति सुरक्षित किया जा सकता है।
वैक्सीनेशन की दर बढ़ाने की भी अपील
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेस ने कहा कई देशों में जारी कोरोना के खतरे के लिए टीकाकरण कवरेज में गिरावट एक बड़ा कारण हो सकती है।
कोविड के नए वैरिएंट्स के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। हर नए उत्परिवर्तन के साथ, इस वायरस की प्रतिरक्षा से बचने की क्षमता और इसके संक्रमण की दर भी बढ़ जाती है। नए वैरिएंट्स की यही क्षमता कोरोना के जोखिमों और संक्रमण के मामलों के बढ़ने के लिए कारण हो सकती है। एक और वैक्सीन नए वैरिएंट्स के कारण होने वाले जोखिमों से बचाने में सहायक हो सकती है।




