मध्यप्रदेश : मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बीते महीने प्रशासन ने संपत्ति के अवैध निर्माण कार्यों पर रोक लगाई। कथित रूप से यहां अभिनेता रणदीप हुड्डा की संपत्ति पर भी निर्माण कार्य चल रहा था। वे यहां होटल बना रहे हैं, जिस पर कोर्ट ने रोक लगा दी गई। रणदीप पर आरोप है कि उन्होंने बिना अनुमति के यहां निर्माण कार्य शुरू किया। इस मामले में अभिनेता ने याचिका दायर की, जिसका आज एमपी हाईकोर्ट ने निपटारा किया है।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने बॉलीवुड अभिनेता रणदीप हुड्डा की उस याचिका का निपटारा कर दिया है, जिसमें उन्होंने मांग की थी कि कान्हा टाइगर रिजर्व के पास उनकी संपत्ति पर कथित निर्माण को लेकर अधिकारियों को उनके खिलाफ कार्रवाई करने से रोका जाए। अदालत ने पाया कि रणदीप हुड्डा की याचिका विचारणीय नहीं है, साथ ही रिजर्व के बफर जोन के पास कथित निर्माण के संबंध में उन्हें जारी किए गए कारण बताओ नोटिस को रद्द करने से भी इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया की एकल पीठ ने कहा, ‘याचिकाकर्ता रणदीप हुड्डा कोई निर्माण कर रहे हैं या नहीं, यह एक विवादित तथ्य है, जिस पर यह न्यायालय निर्णय नहीं कर सकता’। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उसने हुड्डा को जारी कारण बताओ नोटिस में लगाए गए आरोपों के गुण-दोष या याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए बचाव के गुण-दोष पर विचार नहीं किया है।
कोर्ट की तरफ से कहा गया है कि कार्यवाही का निर्णय बालाघाट जिले के बैहर के अनुविभागीय अधिकारी द्वारा रिकॉर्ड में आए साक्ष्यों के अनुसार किया जाएगा। मालूम हो कि अनुविभागीय अधिकारी बालाघाट ने 18 जून को हुड्डा को नोटिस जारी किया था, जिसमें विभिन्न विभागों से अनिवार्य मंजूरी के बिना निर्माण कार्य करने के बारे में एक जांच समिति की रिपोर्ट का हवाला दिया गया था और उन्हें तुरंत काम रोकने का निर्देश दिया था।
एसडीओ ने याचिकाकर्ता को 19 जून को संबंधित अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने और यदि कोई मंजूरी मांगी गई हो तो उससे संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा था। इसके बाद हुड्डा ने हाईकोर्ट का रुख किया। सरकारी वकील ने याचिका को समय से पहले की याचिका बताया। अदालत ने गुरुवार को अपने आदेश में कहा, ‘याचिका का निपटारा इस टिप्पणी के साथ किया जाता है कि यदि याचिकाकर्ता जांच समिति द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट की प्रति की आपूर्ति के लिए आवेदन करता है, तो उसे आवेदन दाखिल करने की तिथि से तीन दिनों के भीतर प्रति प्रदान की जाएगी’। साथ ही अदालत ने कई टिप्पणियां भी कीं।




