रायबरेली। जिले की सूरत बदलने का रास्ता खुल गया है। स्टेट कैपिटल रीजन में शामिल होने के बाद जिले की 34 लाख से अधिक आबादी को मेट्रो सिटी जैसी सुविधाएं मिलेंगी। प्रदेश कैबिनेट में मंजूरी के बाद राज्यपाल ने भी एससीआर को हरी झंडी दे दी है। 4609 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बसे जिले के लोगों को जल्द ही मेट्रो, बाईपास, ओवरब्रिज आदि बड़े शहरों की सुविधाएं मिलने के साथ ही रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। जिले में व्यावसायिक और आवासीय गतिविधियों के भी बढ़ने की उम्मीद बढ़ गई है।
दिल्ली एनसीआर की तर्ज पर लखनऊ को एससीआर बनाने की प्रक्रिया पिछले दो साल से चल रही है। लखनऊ व उसके आसपास के जिलों के साथ ही एससीआर में रायबरेली के पूरे क्षेत्र को शामिल किया गया है। एससीआर में शामिल होने के बाद जिले में मल्टी स्टोरी भवन, बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के साथ ही अन्य हाईटेक सुविधाओं का लाभ लोगों को मिलेगा।
गांव स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने से लोगों को रोजी-रोटी के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी। टाउनशिप का दायरा बढ़ने के साथ ही जिले के विकास में और तेजी आएगी। खासकर शहर के साथ ही गांवों के लोगों का रहन-सहन और सुधरेगा।
दिल्ली एनसीआर की तर्ज पर होगा काम
नेशनल कैपिटल रीजन में जैसे दिल्ली के आसपास के जिलों को राष्ट्रीय राजधानी की ही तहत योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया गया है। वैसे ही एससीआर में लखनऊ और उसके आसपास के जिलों का विकास लखनऊ की ही तरह किया जाएगा। एससीआर में रायबरेली के अलावा लखनऊ, सीतापुर, उन्नाव, बाराबंकी, हरदोई जिलों को शामिल किया गया है।
शासन स्तर पर एससीआर को राज्यपाल ने स्वीकृति दे दी है। एससीआर में रायबरेली को भी शामिल किया गया है। शासन से जो भी दिशा-निर्देश आएंगे, उसके अनुसार जिले में विकास से संबंधित कार्यों व निर्देशों का पालन कराया जाएगा।




