बिलासपुर। ग्राम पंचायतों में सरकारी राशि के गबन और अनियमितताओं से जुड़े मामलों में बिलासपुर जिले के चार जनपद पंचायतों में 3.14 करोड़ रुपए से अधिक की वसूली अब भी लंबित है। मस्तूरी, बिल्हा, कोटा और तखतपुर में पूर्व सरपंचों और सचिवों से जुड़े कई मामले वर्षों पुराने हैं। कुछ प्रकरणों में करीब दो दशक बीतने के बाद भी पूरी राशि की वसूली नहीं हो सकी है।
इन मामलों में नोटिस, वसूली आदेश और राजस्व वसूली प्रमाणपत्र (RRC) जैसी प्रक्रियाएं अपनाई गई हैं, लेकिन कई प्रकरणों में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। इससे पंचायतों में सरकारी राशि की वसूली की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 92 में पंचायत की राशि, अभिलेख या सामग्री वापस लेने के प्रावधान हैं। आदेश का पालन नहीं करने पर संबंधित व्यक्ति को अधिकतम 30 दिन के सिविल जेल भेजने का प्रावधान है। राशि की वसूली भू-राजस्व के बकाए की तरह की जा सकती है। रिकॉर्ड या सामग्री के लिए तलाशी वारंट भी जारी किया जा सकता है। हालांकि कार्रवाई से पहले संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर देना जरूरी है।
कहीं मृत्यु, कहीं पुराने रिकॉर्ड से अटकी कार्रवाई
लंबित मामलों में कुछ जगह संबंधित व्यक्ति की मृत्यु, राशि जमा नहीं होने और पुराने रिकॉर्ड के कारण कार्रवाई प्रभावित होने की स्थिति सामने आई है। प्रशासनिक स्तर पर पत्राचार और राजस्व वसूली की प्रक्रिया चलती रही है, लेकिन कई मामलों में अंतिम वसूली अब तक नहीं हो पाई।
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि सरपंचों से वसूली से जुड़े प्रकरण जनपद से भेजे गए हैं। प्रत्येक मामले में संबंधित पक्ष को सुनने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
वहीं अधिवक्ता संतोष कुमार पांडेय के अनुसार, जांच और सुनवाई पूरी होने के बाद वैधानिक वसूली प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए। यदि जांच में आपराधिक कृत्य के पर्याप्त तथ्य मिलते हैं तो मामले के तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आपराधिक कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है।




