Gandhi Jayanti 2026 : नई दिल्ली। देशभर में आज 2 अक्टूबर को गांधी जयंती मनाई जा रही है। यह दिन महात्मा गांधी की जयंती के रूप में मनाया जाता है। स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी संस्थानों में उनके जीवन, विचारों और स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को याद किया जाता है।
महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा को अपने संघर्ष का आधार बनाया। उन्होंने कई आंदोलनों के जरिए आम लोगों को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ा। उनके जीवन से जुड़े कई प्रसंग आज भी इतिहास और सामान्य ज्ञान का हिस्सा हैं।
पोरबंदर में हुआ था जन्म
मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उनके पिता करमचंद गांधी राजकोट रियासत में दीवान रहे थे, जबकि उनकी माता का नाम पुतलीबाई था।
बचपन से ही गांधी के जीवन में सादगी और धार्मिक संस्कारों का प्रभाव रहा। आगे चलकर इन्हीं अनुभवों ने उनके विचारों को आकार दिया।
पढ़ाई के बाद पहुंचे दक्षिण अफ्रीका
गांधी ने कानून की पढ़ाई पूरी की और वकालत के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका गए। वहां उन्हें नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ा।
दक्षिण अफ्रीका में ही उन्होंने अन्याय के खिलाफ अहिंसक तरीके से संघर्ष करने का प्रयोग शुरू किया। इसी दौर में सत्याग्रह उनके आंदोलन का प्रमुख माध्यम बना।
भारत लौटकर स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े
गांधी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे। इसके बाद उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों का दौरा किया और किसानों तथा आम लोगों की समस्याओं को करीब से समझा।
1917 का चंपारण सत्याग्रह उनके भारतीय राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। इसके बाद वे स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए।
बड़े आंदोलनों का किया नेतृत्व
गांधी ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ कई बड़े जनआंदोलनों का नेतृत्व किया। असहयोग आंदोलन, नमक कानून के खिलाफ दांडी मार्च और भारत छोड़ो आंदोलन इनमें प्रमुख रहे।
इन आंदोलनों में बड़ी संख्या में आम लोगों की भागीदारी हुई। गांधी का जोर अहिंसक तरीके से ब्रिटिश शासन का विरोध करने पर रहा।
खादी और स्वदेशी को बनाया आंदोलन का हिस्सा
गांधी ने आजादी की लड़ाई को केवल राजनीतिक आंदोलन तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने खादी, स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और स्वच्छता जैसे विषयों को भी जनआंदोलन से जोड़ा।
वे ग्रामीण भारत और आम लोगों की भागीदारी को स्वतंत्रता संघर्ष का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते थे।
बापू और राष्ट्रपिता नाम से हुए लोकप्रिय
गांधी को देशभर में प्यार से ‘बापू’ कहा गया। सुभाष चंद्र बोस ने 1944 में एक रेडियो संदेश में उन्हें ‘राष्ट्रपिता’ कहकर संबोधित किया था। हालांकि ‘राष्ट्रपिता’ भारत सरकार की ओर से दी गई कोई औपचारिक संवैधानिक उपाधि नहीं है।
आजादी के समय भी जारी रखा शांति का संदेश
15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। उस समय देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक तनाव था। गांधी ने ऐसे दौर में शांति और आपसी सद्भाव के लिए काम किया।
उन्होंने लोगों से हिंसा छोड़कर भाईचारा बनाए रखने की अपील की।
30 जनवरी 1948 को हुई हत्या
30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली में नाथूराम गोडसे ने गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी। उनकी मृत्यु के बाद देशभर में शोक की लहर फैल गई।
गांधी की मृत्यु ने उनके विचारों और अहिंसा के संदेश को भारत के साथ-साथ दुनिया के कई हिस्सों में चर्चा का विषय बना दिया।
2 अक्टूबर को मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस
महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में भी मान्यता दी है। इस दिन दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अहिंसा और शांति के महत्व पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
10 लाइनों में गांधी जी का जीवन
- मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर में हुआ था।
- उन्होंने कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद वकालत की।
- दक्षिण अफ्रीका में उन्होंने नस्लीय भेदभाव के खिलाफ संघर्ष किया।
- सत्याग्रह और अहिंसा उनके संघर्ष के प्रमुख साधन बने।
- 1915 में भारत लौटने के बाद वे स्वतंत्रता आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़े।
- चंपारण सत्याग्रह ने उन्हें देश के बड़े जननेताओं में स्थापित किया।
- उन्होंने असहयोग, सविनय अवज्ञा और भारत छोड़ो आंदोलन का नेतृत्व किया।
- खादी, स्वदेशी, स्वच्छता और सामाजिक सद्भाव पर उन्होंने जोर दिया।
- 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली में उनकी हत्या कर दी गई।
- उनकी जयंती 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में भी मनाई जाती है।




