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NEET UG 2026 पेपर लीक: कोड नेम से चलता था खेल

  • August 8, 2026
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नई दिल्ली। NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI की चार्जशीट ने कई अहम खुलासे किए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि परीक्षा से तीन दिन पहले ही प्रश्नपत्र लीक हो गया था और सवाल WhatsApp, Telegram तथा ऑफलाइन क्लासों के जरिए छात्रों तक पहुंचाए गए। चार्जशीट के अनुसार इस पूरे नेटवर्क में NTA से जुड़े कुछ विषय विशेषज्ञ, कोचिंग संचालक, बिचौलिए और अन्य लोग शामिल थे।

पुणे और लातूर में चलीं कथित ‘स्पेशल क्लास’

CBI के मुताबिक केमिस्ट्री के विषय विशेषज्ञ पी.वी. कुलकर्णी ने गोपनीयता की शपथ लेने के बावजूद 25 से 27 अप्रैल के बीच पुणे में कथित तौर पर ‘स्पेशल क्लास’ आयोजित की। एजेंसी का दावा है कि इन क्लासों में छात्रों को वही सवाल और उनके जवाब लिखवाए गए, जो बाद में NEET परीक्षा में पूछे गए। इसी तरह लातूर में भी कुछ छात्रों को विशेष क्लास दी गई थी।

डिजिटल सबूतों का दावा

जांच एजेंसी का कहना है कि ‘माय गेट’ ऐप के रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल से यह पुष्टि हुई कि छात्र कुलकर्णी के घर पहुंचे थे। CBI के अनुसार छात्रों की नोटबुक में लिखे सवाल कथित लीक पेपर से मेल खाते हैं। कुलकर्णी के मोबाइल से केमिस्ट्री के सवालों की तस्वीरें, उम्मीदवारों और उनके अभिभावकों से बातचीत समेत कई डिजिटल सबूत मिलने का भी दावा किया गया है।

फिजिक्स के सवाल लीक करने का भी आरोप

चार्जशीट में फिजिक्स विषय की विशेषज्ञ मनीषा हवालदार पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। CBI के अनुसार उन्होंने गोपनीयता की शपथ के बावजूद 25 हजार रुपये लेकर फिजिक्स के सवाल लीक किए। जांच में दावा किया गया है कि परीक्षा से आठ दिन पहले उनके मोबाइल में हाथ से लिखे सवाल मौजूद थे। आरोप है कि उन्होंने ये सवाल दूसरे आरोपी तेजस शाह को लिखवाए, जिसने उन्हें आगे पहुंचाया।

छात्रों और अभिभावकों से लाखों रुपये लेने का आरोप

CBI के मुताबिक मनीषा वाघमारे पूरे नेटवर्क में छात्रों और विषय विशेषज्ञों के बीच कड़ी का काम कर रही थीं। उन पर आरोप है कि उन्होंने अभिभावकों से चार लाख रुपये तक लेकर छात्रों को ऑफलाइन क्लास में भेजा, रकम जुटाई और बाद में WhatsApp के जरिए फिजिक्स के सवाल साझा किए। जांच एजेंसी का दावा है कि यदि वही सवाल परीक्षा में आते, तो अतिरिक्त 50 हजार रुपये भी मांगे जाते।

‘FIFA World Cup 2026’ नाम से बनाया गया WhatsApp ग्रुप

जांच में कई WhatsApp ग्रुप सामने आए हैं। इनमें ‘NEET 2026’ और ‘FIFA World Cup 2026’ नाम के ग्रुप शामिल हैं, जिनके जरिए कथित तौर पर प्रश्न और अन्य जानकारियां साझा की गईं। CBI का कहना है कि पहचान छिपाने के लिए कोड वर्ड का इस्तेमाल किया गया। NTA के मास्टर सेट के लिए ‘कैलाश’ और ‘शिवालिक’ जैसे कोड नाम रखे गए थे। वहीं, एक आरोपी ने अपने सहयोगी का नंबर ‘AP Broker’ नाम से सेव किया था।

सीकर के कोचिंग नेटवर्क की भी जांच

चार्जशीट में राजस्थान के सीकर स्थित एक कोचिंग नेटवर्क का भी जिक्र है। आरोप है कि 2 मई की रात परीक्षा से पहले कथित लीक PDF 40 से 50 छात्रों के बीच बांटी गई। इसे ‘सबसे संभावित प्रश्नपत्र’ बताकर छात्रों तक पहुंचाया गया। परीक्षा के बाद कुछ छात्रों ने वीडियो बनाकर दावा किया कि वही सवाल परीक्षा में पूछे गए।

सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

CBI ने NTA की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार प्रश्नपत्र तैयार करने और अनुवाद के दौरान एक ही विशेषज्ञ को चारों मास्टर सेट देखने का अवसर मिलता था। विशेषज्ञों की पर्याप्त तलाशी नहीं होती थी और पूरे परिसर की निगरानी के लिए अलग कंट्रोल रूम भी नहीं था। एजेंसी का दावा है कि इसी कमजोरी का फायदा उठाकर प्रश्न बाहर ले जाए गए।

विशेषज्ञों की रिपोर्ट का भी जिक्र

चार्जशीट में दिल्ली विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की रिपोर्ट का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार बायोलॉजी के कथित लीक सवालों का आधिकारिक प्रश्नपत्र से 90 प्रतिशत तक और केमिस्ट्री के कई सेटों में लगभग 100 प्रतिशत तक मिलान पाया गया। CBI का कहना है कि इससे उसके दावे को मजबूती मिली है।

कोर्ट में चल रही सुनवाई

CBI के अनुसार 3 मई 2026 को परीक्षा समाप्त होने के बाद सीकर के एक केमिस्ट्री शिक्षक ने कथित लीक PDF और वास्तविक प्रश्नपत्र का मिलान किया। सवालों के मेल खाने के बाद NTA के महानिदेशक को ईमेल भेजा गया, जिसके बाद मामले की विस्तृत जांच शुरू हुई। फिलहाल दिल्ली की फास्ट ट्रैक कोर्ट में CBI की चार्जशीट पर सुनवाई जारी है। अदालत अब तय करेगी कि आरोपियों के खिलाफ किन धाराओं में संज्ञान लिया जाएगा और मुकदमे की आगे की प्रक्रिया कैसे चलेगी।


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