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NEET पेपर लीक प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- आपराधिक तत्वों को नहीं मिलेगी राहत

  • August 4, 2026
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नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने नीट पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शनों से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि प्रदर्शन की आड़ में शामिल किसी भी गंभीर आपराधिक तत्व को बख्शा नहीं जाएगा। अदालत ने साथ ही यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने या बंद करने का निर्णय दिल्ली समेत संबंधित राज्य सरकारें अपने स्तर पर ले सकती हैं।

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सोमवार को सुनवाई के दौरान कहा कि यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि पुलिस की ज्यादती करने वाले अधिकारी या प्रदर्शनकारियों के बीच मौजूद आपराधिक तत्वों को किसी प्रकार की छूट मिलेगी।

पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए एसआईटी या न्यायिक समिति पर विचार
प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह पुलिस की भूमिका की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) या किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच समिति गठित करने के विकल्प पर विचार कर रहा है।

पीठ ने कहा कि अदालत के सामने दो विकल्प हैं, जिनमें पुलिस अधिकारियों की एसआईटी या रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली समिति शामिल है।

पैलेट गन के इस्तेमाल पर बनेगा प्रोटोकॉल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा भी उठाया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस संबंध में व्यापक दिशा-निर्देश तैयार करेगा ताकि भविष्य में यह स्पष्ट हो सके कि पैलेट गन का उपयोग कब, किन परिस्थितियों में और किस प्रक्रिया के तहत किया जा सकता है।

राज्यों को एफआईआर वापस लेने की छूट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार सहित अन्य राज्य सरकारें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को वापस लेने या बंद करने के लिए स्वतंत्र हैं। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि यह छूट गंभीर अपराधों में शामिल लोगों पर स्वतः लागू नहीं होगी।

‘आपराधिक रिकॉर्ड’ का मतलब केवल गंभीर अपराध
अदालत ने 28 जुलाई को दिए गए अपने आदेश को स्पष्ट करते हुए कहा कि ‘आपराधिक रिकॉर्ड’ से उसका आशय केवल गंभीर और जघन्य अपराधों से है, न कि सामान्य या छोटे मामलों से।

18 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अंतिम आदेश देने से पहले वह सभी संबंधित राज्यों का पक्ष सुनना चाहता है। मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।


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