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World ORS Day : डिहाइड्रेशन से बचने का सबसे सस्ता और असरदार तरीका, जानिए ORS कब और कैसे लेना चाहिए

  • July 30, 2026
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नमक, चीनी और पानी से बने घोल को जीवन रक्षक घोल कहा जाता है। यह एक घोल हर साल दुनिया भर में लाखों लोगों की जान बचाता है। जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है और सोडियम-पोटैशियम जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर से बाहर निकल जाती है, तो डिहाइड्रेशन की स्थिति पैदा हो जाती है। इस स्थिति में ओआरएस पानी की कमी को जल्दी से पूरी करता है।

हर साल 29 जुलाई को World ORS Day मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को ओआरएस के महत्व और इसके सही इस्तेमाल के बारे में जागरूक करना है। पानी की कमी को तुरंत पूरा करने के लिए यह एक सस्ता, आसानी से उपलब्ध और बेहद प्रभावी तरीका है, जिसे साफ पानी में मिलाकर पिया जाता है।

जीवन रक्षक घोल का इतिहास

ORS की शुरुआत 1960 के दशक में भारतीय उपमहाद्वीप में हैजा के फैलने के बाद हुई थी। उस समय डिहाइड्रेशन के इलाज के लिए IV फ्लूड का इस्तेमाल किया जाता था। इसके लिए अस्पताल, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी और विशेष उपकरणों की जरूरत होती थी।

ओआरएस के आने के बाद इलाज में बड़ा बदलाव आया। इससे IV फ्लूड की जरूरत लगभग 80 फीसदी तक कम हो गई। प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल द लैंसेट ने ओरल रिहाइड्रेशन थेरेपी को 20वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण चिकित्सकीय खोजों में से एक बताया था।

कैसे काम करता है ओआरएस?

ओआरएस शरीर में सोडियम-ग्लूकोज को-ट्रांसपोर्ट नामक प्रक्रिया के जरिए काम करता है। बता दें कि डायरिया या उल्टी के दौरान भी छोटी आंत सोडियम और ग्लूकोज को अवशोषित कर सकती है। ग्लूकोज, सोडियम के साथ मिलकर शरीर में पानी को तेजी से अवशोषित करता है। इससे शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बैलेंस हो जाता है।

ओआरएस का इस्तेमाल कब किया जाता है

  • डायरिया
  • उल्टी
  • डिहाइड्रेशन
  • लू
  • अधिक पसीना आने पर
  • खिलाड़ियों में शरीर में पानी की कमी होने पर
  • गर्म वातावरण में काम करने वाले लोगों में थकान और डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए
  • तेज बुखार होना
  • लगातार उल्टी होना
  • ORS लेने के बाद भी डिहाइड्रेशन बढ़ना
  • गंभीर डिहाइड्रेशन, जिसमें IV फ्लूड की जरूरत पड़ सकती है

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