रायपुर। छत्तीसगढ़ में राज्य स्थापना के बाद पहली बार सरकारी अस्पतालों का फायर सेफ्टी ऑडिट निजी एनजीओ को सौंपा गया है। अब तक यह काम मुफ्त में अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विभाग करता था। लेकिन अब इस काम के लिए छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी) ने छत्तीसगढ़ फायर सेफ्टी डिजास्टर मैनेजमेंट कमेटी नाम के एनजीओ को ठेका दे दिया है।
इसके तहत सरकारी अस्पतालों को 7 से 20 रुपए प्रति वर्गफुट के हिसाब से शुल्क देना होगा। प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पतालों से एनजीओ को करोड़ों की कमाई होगी। इस फैसले पर पारदर्शिता और वित्तीय बोझ को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
कैसे बदला नियम?
अभी तक अस्पतालों का फायर ऑडिट अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विभाग करता था। यह सेवा अस्पतालों को निशुल्क मिलती थी। अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, हर साल अस्पतालों को फायर एनओसी के लिए आवेदन करना होता है। इसके बाद विभाग का विशेषज्ञ दल जाकर ऑडिट करता था।
अभी तक का प्रावधान
एनओसी के लिए फायर सेफ्टी चेक निशुल्क होता था।
किसी अस्पताल द्वारा अनुरोध करने पर भी फ्री में ऑडिट किया जाता था।
लेकिन सीजीएमएससी ने राज्य स्थापना के बाद पहली बार इस प्रक्रिया को बदलकर एनजीओ को यह जिम्मेदारी सौंप दी।
क्या है एनजीओ की कमाई का गणित?
छत्तीसगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेज 2 एकड़ या उससे अधिक क्षेत्र में फैले हुए हैं। ऐसे में प्रत्येक मेडिकल कॉलेज को एनजीओ को लगभग 5 करोड़ रुपए का भुगतान करना होगा।
मेडिकल कॉलेज: 5 करोड़ रुपए प्रति कॉलेज।
जिला अस्पताल: मेडिकल कॉलेज के बराबर राशि।
सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र: छोटे आकार के बावजूद शुल्क वसूला जाएगा।
फायर ऑडिट के इस ठेके से एनजीओ को हर साल 15-20 करोड़ रुपए से अधिक की कमाई होने की संभावना है।
ठेका देने की प्रक्रिया पर सवाल
सीजीएमएससी के एमडी पद्मिनी भोई द्वारा 11 नवंबर 2024 को स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर एनजीओ को पैनल में शामिल किया गया। इसके बाद सभी जिलों के सीएमएचओ और मेडिकल कॉलेज के डीन को निर्देश दिया गया कि वे इस एनजीओ से फायर ऑडिट करवाएं।
अब सवाल खड़े हुए
- पारदर्शिता का अभाव: एनजीओ को ठेका देने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी थी?
- नीति का अभाव: प्रदेश में अभी फायर सेफ्टी ऑडिट के लिए कोई स्पष्ट नीति नहीं है। ऐसे में क्या थर्ड पार्टी को ठेका देना नियमों का उल्लंघन नहीं है?
- सरकारी खर्च का बोझ: पहले यह सेवा मुफ्त थी। अब इसके लिए सरकारी धन खर्च होगा।
फायर ऑडिट का ठेका निजी एनजीओ को देने के सवाल पर सीजीएमएससी की एमडी पद्मिनी भोई ने सफाई दी है। उन्होंने कहा, “मैंने कोई आदेश जारी नहीं किया है।”
क्या कहता है फायर विभाग?
अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, फायर ऑडिट पहले विभाग के विशेषज्ञ निशुल्क करते थे। हाल ही में रायपुर के सभी सरकारी अस्पतालों का फायर ऑडिट किया गया है।
विभाग के मुताबिक
फायर एनओसी जारी करने के लिए हर साल ऑडिट जरूरी होता है।
यह काम निशुल्क होता रहा है।
छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के बाद पहली बार ऐसा निर्णय
छत्तीसगढ़ में 2000 में राज्य स्थापना के बाद यह पहली बार हुआ है कि सरकारी अस्पतालों का फायर सेफ्टी ऑडिट किसी निजी एनजीओ को सौंपा गया है। इससे पहले यह काम हमेशा सरकारी विभाग करता था। इस निर्णय से सरकारी खर्च बढ़ने के साथ-साथ पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
क्या होनी चाहिए अगली कार्रवाई?
- फायर सेफ्टी नीति: प्रदेश में फायर सेफ्टी ऑडिट की स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए।
- ठेके की जांच: एनजीओ को ठेका देने की प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए।
- जवाबदेही: फायर ऑडिट के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग को रोका जाए।
फायर सेफ्टी जैसा गंभीर विषय अब विवादों के घेरे में है। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के बाद पहली बार सरकारी विभाग के काम को निजी एनजीओ को सौंपने से न केवल सरकारी खर्च बढ़ेगा, बल्कि पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं। मामले की जांच और स्पष्ट नीति की जरूरत है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अस्पतालों की सुरक्षा और सरकारी धन का सही उपयोग हो।




