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भारत में केवल इन तीन जू में मौजूद है लाल पांडा, लुप्त होने लगी इनकी प्रजातियां जाने इसकी अनोखी कहानी …

  • September 22, 2024
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नई दिल्ली : भारत देश में जीव-जंतु और पशुओं की कई प्रजातियां मौजूद है तो कई अब अपना अस्तित्व खोने लगी है। वैसे तो शेर, चीते, बाघ और हिरण की तादाद आज भी देखने के लिए बमुश्किल से मिल जाती है लेकिन कई वन्य प्राणियों की प्रजातियां कुछ ही बची हुई है जिन्हें संरक्षण दिया गया है। आज दुनियाभर में लुप्तप्राय हो रहे लाल पांडा को समर्पित दिन है जिन्हें आने वाले दशकों में शायद ही हम देख पाएंगे। सबसे खुबसूरत वन्य जीव लाल पांडा दुनिया में करीब 10 हजार के करीब रह गए है लेकिन भारत में कुछ जगह पर सिर्फ देखने के लिए मिल जाए तो अलग बात है।

भारत में यहां संरक्षित है लाल पांडा
लाल पांडा, अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है जिसकी अपनी लाल-भूरी फर, बड़ी-बड़ी आंखों और झाड़ीदार पूंछ है इन्हें दुनिया का सबसे प्यारा जानवर भी कहा जाता है, क्योंकि ये किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते। भारत में लाल पांडा एक दुर्लभ और संकटग्रस्त प्राणी है. इसका मुख्य निवास स्थान पूर्वी हिमालय और दक्षिण-पश्चिमी चीन के पहाड़ी क्षेत्र हैं. नैनीताल जू में इनका संरक्षण किया जा रहा है, जिससे पर्यटक इन्हें नजदीक से देख सकते हैं. लाल पांडा के विलुप्त होने की वजह इनका शिकार है।

दरअसल लाल पांडा का शिकार करके लोग इसकी खाल निकाल लेते है। इसके प्रयोग से महिलाएं इसकी टोपी बनाकर इसकी पूंछ को अपनी चुटिया के रूप में पहनती थीं। इस वजह से लाल पांडा का अस्तित्व अब खत्म होने लगा है। यहां पर जानकारी के लिए बताते चलें तो, लाल पांडा मुख्य रूप से शाकाहारी होता है और बांस की पत्तियों को खाना पसंद करता है उसकी पसंदीदा घास रिंगाल घास है। इसके अलावा यह फल, अंडे और छोटे कीड़े-मकोड़े को भी खाता है।

लाल पांडा जहां अभी नैनीताल में मौजूद है तो वहीं पर इन्हें खाने में सेब, केले, शहद और दूध दिया जाता है। इसके अलावा कम ही जगह पर अब लाल पांडा देखने के लिए मिल जाते है इन्हें काफी संरक्षण की आवश्यकता है जो अब उन्हें कम ही मिल रहा है। बता दें कि, साल 2014 में दार्जिलिंग के चिड़ियाघर से दो रेड पांडा यहां लाए गए थे. आज इनकी संख्या बढ़कर 7 हो चुकी है।


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