Chanamurraa

सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच EOW को सौंपने की तैयारी, DGP ने दिए बड़े संकेत

  • August 13, 2026
  • 1 Views
Spread the love

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच अब आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) को सौंपे जाने की संभावना बढ़ गई है। पुलिस महानिदेशक (DGP) अरुण देव गौतम ने बिलासपुर में कहा कि मामला गंभीर है और आर्थिक अनियमितताओं की जांच के लिए विशेषज्ञ एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपने का प्रस्ताव भेजा गया है।

DGP ने अब तक की पुलिस जांच और कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस ने मामले की जांच ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ की है। हालांकि, आर्थिक गड़बड़ियों से जुड़े पहलुओं की विस्तृत जांच के लिए विशेषज्ञ एजेंसी की जरूरत महसूस की गई है। इसी दिशा में प्रस्ताव भेजा गया है।

17 करोड़ से ज्यादा का मुआवजा बांटने का आरोप

मामले के अनुसार, सरकारी नियमों के तहत सर्पदंश से मौत होने पर मृतक के परिजनों को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। आरोप है कि इसी योजना का गलत फायदा उठाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और कई सामान्य मौतों को सर्पदंश से हुई मौत बताकर मुआवजा हासिल किया गया।

जशपुर में पिछले तीन वर्षों में सर्पदंश से 96 मौतें दर्ज हुईं, जबकि बिलासपुर में कथित तौर पर 431 मौतें दिखाकर 17 करोड़ 24 लाख रुपये का मुआवजा बांट दिया गया। यह मामला बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने विधानसभा में उठाया था। इसके बाद राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया था।

डॉक्टर, पुलिसकर्मी समेत 17 गिरफ्तार

जांच में यह भी आरोप सामने आया कि कुछ मामलों में परिजनों की जानकारी या सहमति के बिना मुआवजे की राशि निकाल ली गई और बाद में रकम बांट ली गई। मामले में डॉक्टर, पुलिसकर्मी और तहसील कर्मचारियों समेत 17 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, कथित ‘एडवोकेट डायमंड गैंग’ में पुलिस, स्वास्थ्य और राजस्व विभाग से जुड़े लोग शामिल थे। आरोप है कि अस्पताल में मौत की सूचना मिलते ही गिरोह सक्रिय होकर सर्पदंश से मौत का फर्जी मामला तैयार करता था और करीब 1.5 लाख रुपये में मुआवजे की कथित सेटिंग की जाती थी। अब EOW जांच से इस पूरे नेटवर्क और आर्थिक लेनदेन की परतें खुलने की उम्मीद है


Spread the love